हमसफ़र

मैं जानता हूँ क्यों तू अब इतना मुस्कुराये,
देखे परेशान तू मुझको तो अपने ग़म भुलाये,
अपनी हसीं का मरहम तू मेरे दर्द पे लगाए,
आँखों में आंसू हो तो उन्हें ख्वाब तू बनाये,
कहीं तुमसे ही दोबारा मुझे इश्क़ ना हो जाये,
तेरे साथ ग़म भी मुझको सुनहरा सा लगे,
तेरे होने से ये घर भरा सा लगे।

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