अमरनाथ यात्रा की कहानी 🙏

अमरनाथ जी की यात्रा पंजीकरण शुरू होते ही, मैं और मेरे दोस्त मेडिकल जांच कराने में जुट गये। आखिरकार ३ दिनो की भाग दौड़ के बाद हमे मेडिकल रिपोर्ट मिल गयी और हम सबने १२ जुलाई की तारीख का यात्रा पंजीकरण कर लिया। यात्रा करने के दो मार्ग है, एक "पहलगाम" के तरफ से है जो कि ३६ किलोमीटर की यात्रा है, और दुसरी "बालटाल" के तरफ से जो कि १६ किमी की है। हमने पहलगाम मार्ग को चुना।

३ महीनो के इंतजार के बाद आखिर वो दिन आ गया जब हमें दिल्ली से ट्रेन की यात्रा शुरू करके जम्मू पहुंचना था। १० जुलाई को हमारी ट्रेन थी, लेकिन हिमाचल प्रदेश में आई बाढ की त्रासदी की वजह से जम्मू मार्ग के सारी ट्रेनें और बसें रद्द कर दी गयी। अब मुश्किल ये थी की जम्मू पहुचें कैसे क्युकि रोड के रास्ते हम जा नही सकते थे। अंत मे हमने हवाई मार्ग से जाने का फैसला किया और १२ जुलाई के टिकट बुक कर लिये।

१२ जुलाई को सुबह ९ बजे हमारी फ्लाइट थी और हम समय से पहले दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गए। वहां पहुंच कर हमे बोर्डिग और चेकिंग करने के बाद फ्लाइट में बैठ गए।

जम्मू पहुंचने मे हमें १:३० घटां लगा और हम वहाँ पहुँच के "भगवतीनगर" बेस कैम्प के लिए रवाना हुए। वहां पहुंचने पर हमे लोगो की बहुत ज्यादा भीड़ मिली क्युकि अमरनाथ यात्रा पिछले ५ दिनो से रोक दी गयी थी। २ घंटे लाईन मे लगने के बाद हम भी "भगवतीनगर कैम्प' में आ गये। सबसे पहले हमने वहाँ पहुंच के RFID कार्ड बनवाया।

RFID कार्ड बनवाने के बाद हमने बेस कैम्प मे चल रहे लंगर में भोजन किया और 'पहलगाम जाने के लिए बस टिकट काउंटर की लाइन में लग गये। वहां बहुत भीड़ थी और हमे टिकट लेने मे लगभग ८ घंटे लग गये। अंत में हमे बस का टिकट और बस नंबर मिला जो कि काफिले के साथ सुबह ४ बजे जाने वाली थी। हमने कैम्प मे थोड़ी देर आराम करने के बाद बस का तलाश किया क्युकि काफी सारी बसें थी तो हमे दुढ़ने मे वक्त लगा।

१३ जुलाई सुबह ५ बजे हम बस से पहलगाम के लिए निकले लेकिन किसी कारण वश आर्मी वालो ने काफिले कों "रामवन" बेस कैम्प मे रोक लिया। वहाँ फिर हम दिन भर रुके और शिव भक्तो के साथ मस्ती भी की।

१४ जुलाई को फिर सुबह हम रामवन से उसी बस से पहलगाम के लिए निकले और लगभग १० बजे तक पहलगाम बेस कैम्प पहुंच गये। वहाँ फिर हमे रोक लिया गया।

अगली सुबह १५ जुलाई को बेस कैम्प से बाहर आकर हम "चन्दनबाड़ी" के लिए टैक्सी मे बैठे जो कि वहाँ से १७ किमी की दूरी पर है। चन्दनबाड़ी चेक प्वाइंट पहुँच के हम लॉईन मे लग गये, जहाँ हमे परमिट चेक कराने मे २ घंटे लग गये।

चन्दनबाड़ी चेक प्वाइंट से एंट्री मिलने के बाद हम वहाँ सें यात्रा के लिए पैदल निकल पड़े। यात्रा के दौरान सबसे पहले "पीसु टॉप" और फिर "जाजिपल" होते हुए हम "शेषनाग" पहुचे। शेषनाग पहुँच के हमने बेस कैम्प मे आराम किया।

अगली सुबह १६ जुलाई को हमने यात्रा शुरू की और पंजतरणी के लिए निकल पड़े। यात्रा के दौरान सुबह से ही बारिश हो रही थी तो रास्ते और कठिन होते गए। पहाड़ पर हम लोग कई बार फिसले और गिरे भी, लेकिन हमे मंजिल तक पहुंचना था, महादेव के दर्शन करने थे। सबसे पहले हमें रास्ते में "बाबल टॉप" फिर "एम जी टाप" (गणेश टाप) मिला, वहां से होते हुए हम पोषपत्री पहुंचे। पोषपत्री मे थोड़ी देर रुककर हमने लंगर मे भोजन किया और वहां से फिर पंचतरणी के लिए निकल पड़े। शाम तक हम पंजतरणी पहुंच चुके थे और वहां रुक कर हमने आराम किया।

१७ जुलाई की सुबह ६:३० बजे हम अमरनाथ गुफा के लिए निकल पड़े। पंजतरणी से  निकलने के बाद हम "संगम टॉप" होते हुए अमरनाथ गुफा के पास पहुंच गये। वहां हमने नदी में स्नान किए और दर्शन के लिए निकल गये। भीड़ के वजह से हमे दर्शन के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ा और हमे दर्शन करने मे २ घंटे लग गये।

हम दर्शन करने के बाद वहाँ से वापस शाम 4 बजे बालटाल मार्ग से उतरने के लिए आगे बढ़ गये। बालटाल मार्ग से उतरते वक्त हमें ५ घंटे लग गये और लगभग ९ बजे तक हम बालटाल कैम्प पहुंच गये और वहां कैंप में रुककर हमने आराम किया।

१८ जुलाई अगली सुबह वहाँ से टैक्सी लेकर हम जम्मू रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए। भाग्य से हमारी ट्रेन भी १८ जुलाई को ही थी। हमे जम्मू स्टेशन पहुंचते पहुंचते रात ८ बज गये। ट्रेन जाने का समय १०:३० बजे का था तो हमने स्टेशन के पास ही होटल में खाना खाया और समय से ट्रेन में जा बैठे। वहां से निकलने के बाद मन बहुत हर्षित था।

अंततः हमे सावन मास के दूसरे सोमवार के दिन श्री अमरनाथ जी बाबा का दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था ❤️

इरादे लाख बनते हैं, बनकर टूट जाते है।
अमरनाथ वही आते है, जिन्हे बाबा बुलाते है।😊

जय बाबा बर्फानी 🙏😍
*हर हर महादेव* 🙏🏼
#amarnathyatra2023

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